रविवार, 17 जनवरी 2016

उच्‍च रक्‍तचाप या हाइपरटेंशन

उच्‍च रक्‍तचाप से दिल की बीमारी, स्‍ट्रोक और यहां तक कि गुर्दे की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। उच्‍च रक्‍तचाप के लिए मेडीकल पर बहुत ज्‍यादा भरोसा करना सही है, इससे आप ठीक भी हो जाएंगे, लेकिन अधिक समय तक यह उपचार लाभकारी नहीं होता है। जब तक आप दवा खाते रहेगें, तब तक आराम रहेगा। बाजार में उच्‍च रक्‍तचाप के लिए कई दवाईयां उपलब्‍ध हैं, जो हाई ब्‍लड़ – प्रेशर को कंट्रोल कर लेती है लेकिन ज्‍यादा दवाई खाना भी सेहत के घातक है, एक समय के बाद दवाईयों का असर धीमा पड़ने लगता है। इसलिए उच्‍च रक्‍तचाप के मामले में हर्बल उपचार भी लाभकारी होता है।
कई जड़ी – बूटियों / पारंपरिक चिकित्‍सा
1) लहसुन – लहसुन उन रोगियों के लिए लाभकारी होता है जिनका ब्‍लड़प्रेशर हल्‍का सा बढ़ा रहता है। ऐसा माना जाता है कि लहसुन में एलिसीन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्‍साइड के उत्‍पादन हो बढ़ाता है और मांसपेशियों की धमनियों को आराम पहुंचाता है और ब्‍लड़प्रेशर के डायलोस्टिक और सिस्‍टोलिक सिस्‍टम में भी राहत पहुंचाता है।
2) सहजन – सहजन का एक नाम ड्रम स्‍टीक भी होता है। इसमें भारी मात्रा में प्रोटीन और गुणकारी विटामिन और खनिज लवण पाएं जाते है। अध्‍ययन से पता चला है कि इस पेड़ के पत्‍तों के अर्क को पीने से ब्‍लड़प्रेशर के सिस्‍टोलिक और डायलोस्टिक पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है। इसे खाने का सबसे अच्‍छा तरीका इसे मसूर की दाल के साथ पकाकर खाना है।
3) आंवला – परम्‍परागत तौर पर माना जाता है कि आंवला से ब्‍लड़प्रेशर घटता है। वैसे आंवला में विटामिन सी होता है जो रक्‍तवहिकाओं यानि ब्‍लड़ वैसेल्‍स को फैलाने में मदद करता है और इससे ब्‍लड़प्रेशर कम करने में मदद मिलती है। आवंला, त्रिफला का महत्‍वपूर्ण घटक है जो व्‍यवसायिक रूप से उपलब्‍ध है।
4) मूली – यह एक साधारण सब्‍जी है जो हर भारतीय घर के किचेन में मिलती है। इसे खाने से ब्‍लड़प्रेशर की बढ़ने वाली समस्‍या का निदान संभव है। इसे पकाकर या कच्‍चा खाने से बॉडी में उच्‍च मात्रा में मिनरल पौटेशियम पहुंचता है जो हाई – सोडियम डाईट के कारण बढ़ने वाले ब्‍लड़प्रेशर पर असर ड़ालता है।
5) तिल – हाल ही के अध्‍ययनों में पता चला है कि तिल का तेल और चावल की भूसी का तेल एक शानदार कॉम्‍बीनेशन है, जो हाइपरटेंशन वाले मरीजों के ब्‍लड़प्रेशर को कम करता है। और माना जाता है कि ब्‍लड़प्रेशर कम करने वाली दवाईयों से ज्‍यादा बेहतर होता है।
6) फ्लैक्‍ससीड या अलसी – फ्लैक्‍ससीड या लाइनसीड में एल्‍फा लिनोनेलिक एसिड बहुतायत में पाया जाता है जो कि एक प्रकार का महत्‍वपूर्ण ओमेगा – 3 फैटी एसिड है। कई अध्‍ययनों में भी पता चला है कि जिन लोगों को हाइपरटेंशन की शिकायत होती है उन्‍हे अपने भोजन में अलसी का इस्‍तेमाल शुरू करना चाहिए। इसमें कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा भी बहुत ज्‍यादा नहीं होती है और ब्‍लड़प्रेशर भी कम हो जाता है।
7) इलायची – बायोकैमिस्‍ट्री और बायोफिजिक्‍स के एक भारतीय जर्नल में एक अध्‍ययन प्रकाशित किया गया जिसमें बताया गया कि बेसिक हाइपरटेंशन के 20 लोग शामिल थे, जिन्‍हे 3 ग्राम इलायची पाउडर दिया गया। तीन महीने खत्‍म होने के बाद, उन सभी लोगों को अच्‍छा फील हुआ और इलायची के 3 ग्राम सेवन से उनको कोई साइडइफेक्‍ट भी नहीं हुआ। इसके अलावा, अध्‍ययन में यह भी बताया गया कि इससे ब्‍लड़प्रेशर भी प्रभावी ढंग से कम होता है। इससे एंटी ऑक्‍सीडेंट की स्थिति में भी सुधार होता है जबकि इसके सेवन से फाइब्रिनोजेन के स्‍तर में बिना फेरबदल हुए रक्‍त के थक्‍के भी टूट जाते है।
8) प्‍याज – प्‍याज में क्‍योरसेटिन होता है, एक ऐसा ऑक्‍सीडेंट फ्लेवेनॉल जो दिल को बीमारियों से अटैक पड़ने बचाता है।
9) दालचीनी – दालचीनी केवल इंसान को केवल दिल की बीमारियों से नहीं बल्कि डायबटीज से बचाता है। ओहाई के एप्‍लाईड हेल्‍थ सेंटर में 22 लोगों पर अध्‍ययन किया गया, जिनमें से आधे लोगों को 250 ग्राम पानी में दालचीनी को दिया गया जबकि आधे लोगों को कुछ और दिया गया। बाद में यह पता चला कि जिन लोगों ने दालचीनी का घोल पिया था, उनके शरीर में एंटीऑक्‍सीडेंट की मात्रा ज्‍यादा अच्‍छी थी और ब्‍लड सुगर भी कम थी।
अधिक जानकारीके लिए --http://ayurveda-foryou.com/treat/hypertension.html

सोमवार, 16 नवंबर 2015

सौंदर्य के लिए केले के फायदे

सौंदर्य के लिए केला बहुत ही फायदेमंद होता है.
1] चेहरे की झुर्रियों के लिए केला बहुत ही फायदेमंद होता है.

इसके लिए 1 पका हुआ केला लीजिये और इसे अच्छी तरह मसल लीजिये.
अब इसमें 1 चम्मच शहद और 10 बूंद जैतून के तेल की डालकर अच्छी तरह मिला लीजिए.
केले के इस फेस पैक को चेहरे व गर्दन पर लगाकर 15 मिनट के लिए छोड़ दीजिए और फिर सादे पानी से धो लीजिए.
ऐसा सप्ताह में 2 बार करने से चेहरे की झुर्रियां खत्म हो जाती हैं और चेहरा चमकने लगता है.

2] बालों के कंडीशनर के लिए भी केले का इस्तेमाल किया जाता है.

इसके लिए 1 पके हुए केले को काट लीजिए.
इसमें 1 छोटा चम्मच शहद, 1 बड़ा चम्मच दही और 1 चम्मच दूध डालकर इस मिश्रण को मिक्सी में पीस लीजिये.
पहले हल्के गर्म पानी से बालों को धो लीजिए फिर इस कंडीशनर को बालों में अच्छी तरह लगा कर Shower Cap पहन लीजिये.
1 घंटे इसे लगा रहने दीजिए और फिर पानी से धो लीजिये.
सप्ताह में 1 बार इस कंडीशनर को लगाने से बालों में चमक आ जाती है.


3] केला एक बहुत अच्छे Cleanser का भी काम करता है.

इसके लिए एक पका हुआ केला काट लीजिए.
इसमें 4 छोटे चम्मच नीबू का रस और बीज निकला हुआ 1/2 खीरा काटकर इसे मिक्सी में पीस कर पेस्ट बना लीजिए.
इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर 1/2 घंटे के लिए छोड़ दीजिए और फिर हल्के गर्म पानी से धो लीजिए.
एक दिन छोड़कर एक दिन ऐसा करने से चेहरा साफ और सुंदर दिखने लगता है साथ ही साथ कील – मुहाँसों से भी छुटकारा मिलता है.

4] शुष्क त्वचा के लिए केला एक बहुत बढ़िया औषधि है.

इसके लिए 1 केले को मसल लीजिये.
इसमें 2 चम्मच दूध की मलाई डालकर अच्छी तरह मिला लीजिए.
इस पेस्ट को चेहरे, गर्दन और हाथों पर लगाकर सूखने दीजिए और फिर पानी से धो लीजिए.
रोज़ाना ऐसा करने से शुष्क त्वचा ठीक हो जाती है और सुन्दरता भी बढ़ने लगती है.


5] टूटते बालों के लिए केले का प्रयोग किया जाये तो बाल मजबूत होकर टूटना बंद हो जाते हैं.

यदि बाल जल्दी-जल्दी टूटते हों तो केले के इस प्रयोग से आप अपने बालों को फिर से मजबूती दे सकते हैं.
1 पके हुए केले का गूदा लीजिए, इसमें 1/2 कटोरी नीबू का रस डालकर अच्छी तरह मिला लीजिए.
इसे बालों की जड़ों में लगाकर 1/2 घंटे के लिए छोड़ दीजिए और फिर हल्के गर्म पानी से बाल धो लीजिए.
ऐसा सप्ताह में 2 बार करना चाहिये. इससे बाल टूटना बन्द होकर बाल मजबूत हो जाते हैं.

मंगलवार, 18 अगस्त 2015

शुक्रवार, 13 जून 2014

गिलोयका उपयोगी योग -गिलोयघनवटी

- fresh Giloy  wash the stalks thoroughly cleaned. Now the small - small pieces and make Yvkut, now a clean - clean brass or iron in the pan, pour water four times, while the remaining four parts of the decoction three - four times Kpd Drain well, it now Other Clean - clean dishes Pakayen on low flame until it should be slightly thick, then it should be able to make a shot from the fires Uthar bike, now its 250 mg mg tablets are dried in the sun to keep making sure that oneGiloygnvti Designed, feel free to use any type of fever, leukorrhea, indigestion, Animic and for vulnerable patients, it is not a safe alternative medicine.
http://ayurveda-foryou.com/ayurveda_herb/guduchi.html

बुधवार, 11 जून 2014

तुलसी



तुलसी में गजब की रोगनाशक शक्ति है। विशेषकर सर्दी, खांसी व बुखार में यह अचूक दवा का काम करती है। इसीलिए भारतीय आयुर्वेद के सबसे प्रमुख ग्रंथ चरक संहिता में कहा गया है। 

- तुलसी हिचकी, खांसी,जहर का प्रभाव व पसली का दर्द मिटाने वाली है। इससे पित्त की वृद्धि और दूषित वायु खत्म होती है। यह दूर्गंध भी दूर करती है। 

- तुलसी कड़वे व तीखे स्वाद वाली दिल के लिए लाभकारी, त्वचा रोगों में फायदेमंद, पाचन शक्ति बढ़ाने वाली और मूत्र से संबंधित बीमारियों को मिटाने वाली है। यह कफ और वात से संबंधित बीमारियों को भी ठीक करती है। 

- तुलसी कड़वे व तीखे स्वाद वाली कफ, खांसी, हिचकी, उल्टी, कृमि, दुर्गंध, हर तरह के दर्द, कोढ़ और आंखों की बीमारी में लाभकारी है। तुलसी को भगवान के प्रसाद में रखकर ग्रहण करने की भी परंपरा है, ताकि यह अपने प्राकृतिक स्वरूप में ही शरीर के अंदर पहुंचे और शरीर में किसी तरह की आंतरिक समस्या पैदा हो रही हो तो उसे खत्म कर दे। शरीर में किसी भी तरह के दूषित तत्व के एकत्र हो जाने पर तुलसी सबसे बेहतरीन दवा के रूप में काम करती है। सबसे बड़ा फायदा ये कि इसे खाने से कोई रिएक्शन नहीं होता है। 

तुलसी की मुख्य जातियां- तुलसी की मुख्यत: दो प्रजातियां अधिकांश घरों में लगाई जाती हैं। इन्हें रामा और श्यामा कहा जाता है। 

- रामा के पत्तों का रंग हल्का होता है। इसलिए इसे गौरी कहा जाता है। 

- श्यामा तुलसी के पत्तों का रंग काला होता है। इसमें कफनाशक गुण होते हैं। यही कारण है कि इसे दवा के रूप में अधिक उपयोग में लाया जाता है। 

- तुलसी की एक जाति वन तुलसी भी होती है। इसमें जबरदस्त जहरनाशक प्रभाव पाया जाता है, लेकिन इसे घरों में बहुत कम लगाया जाता है। आंखों के रोग, कोढ़ और प्रसव में परेशानी जैसी समस्याओं में यह रामबाण दवा है। 

- एक अन्य जाति मरूवक है, जो कम ही पाई जाती है। राजमार्तण्ड ग्रंथ के अनुसार किसी भी तरह का घाव हो जाने पर इसका रस बेहतरीन दवा की तरह काम करता है। 

मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी - मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी, जैसे मलेरिया में तुलसी एक कारगर औषधि है। तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर पीने से मलेरिया जल्दी ठीक हो जाता है। जुकाम के कारण आने वाले बुखार में भी तुलसी के पत्तों के रस का सेवन करना चाहिए। इससे बुखार में आराम मिलता है। शरीर टूट रहा हो या जब लग रहा हो कि बुखार आने वाला है तो पुदीने का रस और तुलसी का रस बराबर मात्रा में मिलाकर थोड़ा गुड़ डालकर सेवन करें, आराम मिलेगा। 

- साधारण खांसी में तुलसी के पत्तों और अडूसा के पत्तों को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से बहुत जल्दी लाभ होता है। 

- तुलसी व अदरक का रस बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलता है। 

- तुलसी के रस में मुलहटी व थोड़ा-सा शहद मिलाकर लेने से खांसी की परेशानी दूर हो जाती है। 

- चार-पांच लौंग भूनकर तुलसी के पत्तों के रस में मिलाकर लेने से खांसी में तुरंत लाभ होता है। 

- शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड़ के साथ पीसकर नि:संतान महिला को खिलाया जाए तो जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है। 
tulasi

- किडनी की पथरी में तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 माह सेवन करने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाती है। 
- फ्लू रोग में तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से लाभ होता है। 

- तुलसी थकान मिटाने वाली एक औषधि है। बहुत थकान होने पर तुलसी की पत्तियों और मंजरी के सेवन से थकान दूर हो जाती है। 

- प्रतिदिन 4- 5 बार तुलसी की 6-8 पत्तियों को चबाने से कुछ ही दिनों में माइग्रेन की समस्या में आराम मिलने लगता है। 

- तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है। इससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है। 

- तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है। 

- तुलसी के पत्तों को तांबे के पानी से भरे बर्तन में डालें। कम से कम एक-सवा घंटे पत्तों को पानी में रखा रहने दें। यह पानी पीने से कई बीमारियां पास नहीं आतीं। 

- दिल की बीमारी में यह अमृत है। यह खून में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है। दिल की बीमारी से ग्रस्त लोगों को तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।
Tulsi

रविवार, 4 अगस्त 2013

Ayurvedic Herbs and Spices

मसाल्यांच्या सुगंधी पदार्थांना रुची आणि स्वाद मसाले देतात आणि इतकंच नव्हे तर त्यांच्यात भरपूर औषधी गुणधर्म आहेत आणि म्हणूनच हजारो वर्षांपासून भारतीय स्वयंपाकामध्ये मसाल्यांना अनन्यसाधारण महत्त्व दिलं गेलं आहे. आयुर्वेदात त्यांचा उपयोग रोगांवर करण्याच्या उपचारांमध्ये होतो.
मसाल्यांचा एकच एक फक्त स्वयंपाकात आणि स्वयंपाकघरातच उपयोग होत नाही; तर ते औषध म्हणून वापरले जातात, सौंदर्यप्रसाधनांमध्ये ते वापरले जातात, कीटकनाशक म्हणूनही मसाल्यांचा वापर केला जातो. तसेच खाण्याचे पदार्थ टिकविण्यासाठी ‘प्रिझर्व्हेटिव्ह’ म्हणूनही त्यांचा उपयोग होतो.
हर्ब्स आणि स्पायसेस फरक काय?
आधुनिक वर्गीकरणाप्रमाणे मसाल्याच्या पदार्थांचं वर्गीकरण हर्ब्स आणि स्पायसेस असं केलं जातं. हर्ब्स म्हणजे हिरव्या वनस्पती आणि स्पायसेस म्हणजे मसाल्याचे पदार्थ. या हर्ब्स आणि स्पायसेसमध्ये वनस्पतीच्या वाळवलेल्या बिया, खोडं, फळं, मुळं, पानं या सगळ्यांचा समावेश होतो. उदाहरणादाखल कोथिंबीर म्हणजे हर्ब, तर धने म्हणजे स्पाइस अर्थात मसाल्याचा पदार्थ. हर्ब्स आणि स्पाइस यामधला फरक समजून घेतला तरच त्यांची साठवण आणि स्वयंपाकात वापर करताना मसाल्यातील पोषणमूल्यं याबाबत काळजी घेता येईल. स्वयंपाकात मसाले वापरले जातात ते त्यांच्या स्वादासाठी. आणि म्हणूनच स्वयंपाकात मसाले वापरताना त्यांचा स्वाद आणि त्यामधली पोषणमूल्यांचा नाश होणार नाही हे पाहणंही खूप महत्त्वाचं असतं.
मसाल्यांचे सुगंधी गट
मसाल्यांना जो सुगंध येतो त्यामध्ये अनेक सुगंधाचं मिश्रण असतं. लाकडासारखा, पाईनसारखा ताजा वास देणार्‍या सुगंधाच्या गटाचं नाव आहे टर्पिन. यामध्ये पुदिना, शहाजिरे, गुलाब पाकळ्या यासारखे मसाल्याचे पदार्थ असतात. या गटाचं वैशिष्ट्य असं की यांचा वास फार लवकर उडू शकतो. त्यामुळे ज्या मसालामिश्रणांमध्ये या गटातले मसाल्याचे पदार्थ असतात, अशी मसालामिश्रणं पदार्थ तयार झाला की, त्यामध्ये आयत्या वेळी घालावीत. दुसरा गट आहे फेनॉलिक संयुगांचा. लवंग, दालचिनी, बडीशेप आणि व्हॅनिला या गटात मोडतात. थाईम, ओरेगॅनो, मिरी आणि आलं यांचा स्वादही यावरच आधारलेला असतो. मसाल्याच्या या पदार्थांमधील फेनॉलिक संयुगं बर्‍याच वेळा पाण्यात विरघळणारी असतात. त्यामुळे पदार्थांमध्ये आणि तो पदार्थ खाताना तोंडामध्ये यांचं अस्तित्व प्रकर्षानं जाणवतं. तिसरा गट आहे तो पन्जन्ट रसायनांचा. मिरी, मिरची, आलं, मोहरी, हॉर्सरेडिश, वासाबी सारखे मसाल्याचे पदार्थ या गटात येतात. पन्जन्ट रसायनांमधले रेणू खूप मोठे असतात. त्यामुळे ते पदार्थामधून लवकरच बाहेर पडू शकत नाहीत. त्यामुळे स्वयंपाकामधल्या प्रक्रियांमध्ये त्यांचा वास नष्ट होत नाही.
टर्पिन्स, फेनॉलिक आणि पन्जन्ट रसायनांमुळे मसाल्यांना त्यांचा सुगंध प्राप्त होतो. बहुतेक मसाल्याच्या पदार्थांमध्ये अँन्टिऑक्सिडंट गुणधर्म असतात ज्यांची शरीराचं एकूण आरोग्य चांगलं राहण्यास मदत होते. बर्‍याचशा मसाल्याच्या पदार्थांमधील अँन्टिऑक्सिडंटस् तेलात किंवा तुपात विरघळतात. यासाठी व मसाल्याचा स्वाद बाहेर येण्यासाठी फोडणीची उत्तम योजना केली गेली. मसाल्यांचा सुगंध, स्वाद उच्च तपमानाला बाहेर येतो.
वासाशिवाय आणखी काय?
बहुतेक सर्व मसाल्याचा पदार्थांमध्ये अँन्टिऑक्सिडंट गुणधर्म असतात. काही मसाल्याच्या पदार्थांमधील अँन्टिऑक्सिडंटस् तेलात किंवा तुपात म्हणजे स्निग्ध पदार्थात विरघळतात, तर काहीतील अँन्टिऑक्सिडंटस् पाण्यात विरघळतात. पण खरं तर खूपशा मसाल्याच्या पदार्थांमधील अँन्टिऑक्सिंडटस् तेला-तुपातच विरघळतात. बहुतेक मसाल्यांमधला स्वाद, सुगंध हा उच्च तपमानाला बाहेर येतो. यासाठीच आपल्याकडे मोहरी, मेथी, हिंग, हळद, लवंग, दालचिनी, तमालपत्र वगैरे मसाल्याचे पदार्थ फोडणीत घालून वापरण्याची अत्यंत योग्य अशी पद्धत आहे. मसाल्याच्या पदार्थांमधील अँन्टिऑक्सिडंट गुणधर्माचा उपयोग उच्च रक्तदाब, कर्करोग, मधुमेह, हृदयविकार, अकाली वार्धक्य अशा दुर्धर रोगांना दूर ठेवण्यासाठी होतो. तसेच यापैकी अनेक पदार्थ पचनासाठी, घशासाठी उत्तम, भूक प्रदिप्त करणारे, त्वचेसाठी, हृदयासाठी, रक्ताभिसरणासाठी म्हणजेच एकूण शरीर आरोग्यासाठी उत्तम असतात. पण हे पदार्थ थोड्या प्रमाणातच सेवन करावे लागतात. नाहीतर शरीराला त्रास होण्याचा संभव असतो. फेनॉलिक संयुगांमध्ये अँन्टिऑक्सिडंट गुणधर्म खूप असतात. ओरेगॅनो, तमालपत्र, डिल, रोझमेरी, हळद, जिरे, आलं यामध्ये हे प्रमाण खूप असतं. एका संशोधनातील निष्कर्षाप्रमाणे जिरे व आलं यामध्ये सगळ्यात उच्च अँन्टिऑक्सिडंट गुणधर्म असतात. पदार्थातील स्वाद, सुगंध, सुगंध कमी होऊ न देण्यासाठीही अँन्टिऑक्सिडंट गुणधर्माचा उपयोग होतो. टर्पिन्सचा उपयोग कर्करोगाला प्रतिबंध करण्यासाठी होतो. तर टर्पिन्स आणि फेनॉलिक संयुगांचा एकत्रित उपयोग हृदयविकार तसेच कर्करोग दोन्हींना प्रतिबंध करण्यासाठी होतो. काही मसाल्याच्या पदार्थांमधून ‘अ’सारखी जीवनसत्त्वं, तर काहींतून लोह, कॅल्शिअम, मॅग्नेशिअमसारखी खनिजं आपल्याला मिळतात.
ओला-सुका मसाला..
कसा पारखाल ?
हर्ब्स या वर्गातले मसाल्याचे पदार्थ म्हणजे कोथिंबीर, पुदिना, ओली लसूण यासारख्या गोष्टी विकत घेताना पानं हिरवीगार, तजेलदार आहेत ना, जुडी आतमध्ये कुजायला लागली नाही ना हे पाहून विकत घ्याव्यात. पानं खुडून पेपरटॉवेल किंवा फडक्यानं त्यातील पाणी टिपून घेऊन कागदाच्या पिशवीत फ्रीजच्या क्रिस्परमध्ये ठेवावीत. वापरण्याआधी धुवून चिरून घ्यावीत व पदार्थ तयार झाला की त्यावर घालावीत. उच्च तपमानाला त्यातील जीवनसत्त्वं नष्ट होतात म्हणून पदार्थ शिजताना या गोष्टी त्यात घालू नये.
मसाल्याचे पदार्थ विकत घेताना ताजे, चमकदार, डागविरहित असे घ्यावे. काही मसाले ताजे असताना हिरवे दिसतात, पण जुने झाले की तपकिरी दिसू लागतात म्हणून ही काळजी घ्यावी. या पदार्थांंची प्रत उच्च असली पाहिजे तरच त्यांचा स्वाद उत्तम येतो. मसाल्याच्या पदार्थांंचा सुगंध हवा, उष्णता, आद्र्रता आणि प्रकाश यांच्या संपर्कात आल्यामुळे कमी होतो म्हणून ज्या दुकानात या पदार्थांंना भरपूर उठाव असेल अशाच दुकानामधून या पदार्थांंची खरेदी करावी. खरेदीपूर्वी शक्य तर वास घ्यावा.
- डॉ. वर्षा जोशी , lokmat