शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

​​“अनिमिया ​​ ​और कुपोषण मुक्त भारत​”  ​​​लोक आंदोलन

हम, भारत् में आज सर्वाधिक लोग अशक्त और अनिमिआसे ग्रस्त है. आओ इसे बदले.

महाभारत​के ​ पांड​वोंके ​​ माता पिता  पांडू और कुंती    ---
​महाभारत​के ​ पांड​वोंके ​​ पिता   ​ सफेद थे. उनमे   रक्त​की ​ कमी​​ थी. उन्हे  पांडुरोग ​था. इसीलिये  उनका नाम  पांडु ​ था. आज भारत​मे  ​सर्वा​धिक  लो​गोंको   ​यही बिमारी है. ।​ ​सर्वा​धिक  लो​ग ​ पांडु है. ​ सरकार ​इसे घटानेके लिये  1970 ​से  विशेष कार्यक्रम ​चालती है।  स​ब डॉक्टर ​सबको इलाज करते है.फिरभी  आज सर्वाधिक लोगोंको  यह बिमारी है. 5 ​मे से ३,४   भारती​योंको ​ ​यह बिमारी है.। इसके कारण हम अशक्त है.अल्पायुषी है. ​और हमे यह मालूम नहिं. ​मालूम नहिं ​यह ​भी ​मालूम नहिं. आओ इसे जाने और  सबको बताये. यह पुण्यका काम है. ​यह सर्वोत्तम  देशसेवा, लोकसेवा ​है ।​  ​हिमोग्लोबिन​ से खून लाल होता है.  उसकी ​ की कमी को  ​, पांडुरोग,​ रक्त अल्पता ​​ कहते है.  ​1 ग्राम ​​​​हिमोग्लोबिन ​यह 1 ग्राम प्रथिन​,​ ​और बिलकुल  थोडे लोह,व फॉलिक एसिड ​और  बी 12 ​, इन दो  ​​जीवन स​त्वोंसे बनता  है. काफी लोगोंमे इन  चारो चीजोंका  अभाव है.ये कहानीयां  पढिये और  देशको अनिमिया मुक्त किजिये.
​कहानी
 लोह निशा​की. उसके जुबान से​​:---

 निशा ​दीदी  सरकारी ​डिप्लोमाधारी परिचारिका ​है. निशा​ कहती है,,"​ मेरे बदनमे  खून कम था. हिमोग्लोवीन ९ ग्राम ​था.  डॉक्टर​ने लोह​ की गोली दी.    मुझे जुलाब ​लगे.​मैने गोली बंद ​दी.​लोहे की कढाई मे  खाना बनाना शुरू किया.मै  ठीक हो गई. मेरा खून बढा. इसके बाद मैने ३ ​बार  रक्त दान  ​किया. अब  मेरा  हिमोग्लोबिन १३ ​ ग्राम है.​ ​अच्छा है.​
सीख १. ​हम सबने लोहेकी कढाई में खाना पकाना चाहिये. ​

वंदना सरकार नागपूर की कहानी

 मेरे पतीको केंसर [कर्करोग] है. वे उसकी दवा खाते ही. उनका खून घटता है. हम हर बार उन्हे  २ बोतल खून देते है. निशासे सिख कर मैने लोहे की कढाई मी खान बनाना शुरू किया.अब  उनका हिमोग्लोबिन ९ से १३ हो गया है. मै सबको संक्रांतीमे लोहे की कढाई भेट दुंगी.

माधुरी ताई प्रवीण राउत, बंबई, ने इस संक्रांती को सबको लोहेकी  कडाई देनेका तय किया है.

​​डॉ. रमेश चेलन ​का  ​अभ्यास ​​प्रसिद्ध​ ​​है.कि ​९७% ​ बच्चे और माताओमे ​लोह​  की ​ कमी ​है .  अनिमिआ ​है. पुरुशोंमे भी ऐसा ही  होगा.
लोह कमी के   दुष्परिणाम ​ऐसे है.१. गर्भपात, ​होना २.  छो​टे , मंद बुद्धी ​बच्चे  होना.3 शिक्षण क्षमता ​​कम ​होना. कार्य क्षमता ​​कम हो​ती  है.५. हिमोग्लोबिन ​​कम हो​ता   है. ​इसे हम  अनिमिआ ​कहते है.  १ ग्राम हिमोग्लोबिन कम​ होनेपर ​२% कार्य क्षमता घट​ती ​है.आओ हम इसे  २०१६ ​मे  बदलेङ्गे. यह जानकारी सब को  देकर.
1 ग्राम हिमोग्लोबिन ​यह  1 ग्राम प्रथिन​ और बिलकुल  थो​डी   मात्रामे लोह,​ और   फॉलिक एसिड व बी 12 ​इन दो  जीव​न  ​सत्वोंसे   बन​ता  है.  ​काफी लोगोंमे इन सबका अभाव है.
​क्या मुझमे इन का अभाव है ? कैसे जाने? मुठ्ठी बंद करो. अब अपनी हाथ की  उंगलीओंके जोडोंको देखो.
ये अगर काले  है,, तो हममे फोलिक एसिड  और बी १२ का अभाव है. उन्हे लेनेपर काला रंग  चल जाता है. हमारा गया.    फॉलिक एसिड :​ यह पता सब्जी और फलोंसे  मिलता है. ​उसे  काम करते समय, या समय मिलने  पर दिनभर खाइयॆ. लाभ होगा. एक करमचंद जासूस हरदम गजर खात था. उसी तरह. ​हमे  रोज 1 मिलिग्रॅम फॉलीक एसिड ​लागता है. 5 मिलीग्रॅम ​की  गो​ली  औषधी दुकान​मे ​ मिल​ती  है.।​१ गो​ली   बाट कर घरके सब लोग रोज ​ले. ​​का​ले दाग जाने  तक ले.
बी 12 जीवनसत्व:
दुध​मे  ​बी 12 ​है.​दहीमे दुधसे  ज्यादा बी 12 ​है.
सब दुध का दही बनाइये. और  खाइये.   संसारमे सर्वाधिक भारत दुध मे होता है.
 बी 12 सिर्फ  फक्त मांसाहार​से ​ मि​लता है। शाकाहारी ​और हफ्तेमे १ बार  मांसाहार ​करनेवाले लोगोंमे  बी 12 ​का  अभाव  ​होता है. इससे दिमाग और   नर्वज (नाडी, माजातंतू) ​को तकलीफ  होती है.  ​पैरमे  गोले आना , दिमागने   काम कम करना   ​​आदी दिमाग की कोई भी तकलीफ हो तो बी १२ लेकर देखिये. लाभ हो सकताहै. मिथाइल कोबाल अमीन ​नामसे लिजिये। 1000 मायक्रो ग्राम ​का  इंजेक्शन ​लिजिये.  ​हर हफ्ता एक  ऐसा  4 ​हफ्ता लिजिये. या ​ ​​उन्गलीके का​ले दाग जाने  तक लिजिये. परदेश​ मे  रहने वाले खूप भारतीय​ लोगोंको उनके  ​ डॉक्टर ​ये  इंजेक्शन ​हर  6 महि​नेमे  एक बार देते है.
लोह, फॉलिक एसिड, बी 12 ​लेकर र्भी , प्रथिन​ ​कम​ ​​होनेके कारण  अशक्त लो​गोन्मे  हिमोग्लोबिन ​ज्यादा बढता नही. रोज ​अनाज कम पडनेसे बच्चे और लोग  ​दुबले  अशक्त हो​ते है. 1 ग्राम हिमोग्लोबिन ब​नेको  1 ग्राम प्रथिन लगता​ है. ​। ​​दुबले  अशक्त​ लोगोंको रोज खानेमे  25 % तक प्रथिन​ [प्रोटीन्स] ​कम पड​ते है. इलाज: ​दुबले  अशक्त​ लोगोंको जेबमे   24 ​घंटा चना , मुंग फल्ली भरकर रखिये.

घरमे एक कोनेमे  चना , मुंग फल्ली, गाजर आदी हरदम भरकर रखिये. दुबले  अशक्त​ लोगोंने उसे दिनभर खाना चाहिये.
उन्हे ज्यादा प्रथिन मिलेंगे.  वे  सशक्त ​बनेङ्गे. खून भी बढेगा . ​चना , मुंग फल्ली ​ना हो तो जो चीज घरमे है उसे दिजिये.  ​​कच्चा चना दाल  दिजिये. सब पचता  है ।महाराष्ट्र मे  सरकार, हमारी सलाह के अनुसार, सबको  एक कोनेमे  चना , मुंग फल्ली, रखनेको कहती है. इससे  महाराष्ट्रातील कमजोर बच्चोंका प्रमाण घटा है.  भारतके  बडे राज्योंके तुलनामे महाराष्ट्रमें कमजोर बच्चोंका प्रमाण अब सबसे कम है.
सावधान: ​बच्चोंको  दूध ​ना दे. दुधमे लोह  ​नही के बराबर है.  दूध ​दुसरे अन्न के लोह को भी खा लेता है. अमेरि​कामे पहले साल बच्चेको दुध देना  मना है. ​ ​​
​यह  लो​गोन्का लोगोन्के लिये ,  अनिमिआ मुक्ती ​आंदोलन है. 

रविवार, 17 जनवरी 2016

उच्‍च रक्‍तचाप या हाइपरटेंशन

उच्‍च रक्‍तचाप से दिल की बीमारी, स्‍ट्रोक और यहां तक कि गुर्दे की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। उच्‍च रक्‍तचाप के लिए मेडीकल पर बहुत ज्‍यादा भरोसा करना सही है, इससे आप ठीक भी हो जाएंगे, लेकिन अधिक समय तक यह उपचार लाभकारी नहीं होता है। जब तक आप दवा खाते रहेगें, तब तक आराम रहेगा। बाजार में उच्‍च रक्‍तचाप के लिए कई दवाईयां उपलब्‍ध हैं, जो हाई ब्‍लड़ – प्रेशर को कंट्रोल कर लेती है लेकिन ज्‍यादा दवाई खाना भी सेहत के घातक है, एक समय के बाद दवाईयों का असर धीमा पड़ने लगता है। इसलिए उच्‍च रक्‍तचाप के मामले में हर्बल उपचार भी लाभकारी होता है।
कई जड़ी – बूटियों / पारंपरिक चिकित्‍सा
1) लहसुन – लहसुन उन रोगियों के लिए लाभकारी होता है जिनका ब्‍लड़प्रेशर हल्‍का सा बढ़ा रहता है। ऐसा माना जाता है कि लहसुन में एलिसीन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्‍साइड के उत्‍पादन हो बढ़ाता है और मांसपेशियों की धमनियों को आराम पहुंचाता है और ब्‍लड़प्रेशर के डायलोस्टिक और सिस्‍टोलिक सिस्‍टम में भी राहत पहुंचाता है।
2) सहजन – सहजन का एक नाम ड्रम स्‍टीक भी होता है। इसमें भारी मात्रा में प्रोटीन और गुणकारी विटामिन और खनिज लवण पाएं जाते है। अध्‍ययन से पता चला है कि इस पेड़ के पत्‍तों के अर्क को पीने से ब्‍लड़प्रेशर के सिस्‍टोलिक और डायलोस्टिक पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है। इसे खाने का सबसे अच्‍छा तरीका इसे मसूर की दाल के साथ पकाकर खाना है।
3) आंवला – परम्‍परागत तौर पर माना जाता है कि आंवला से ब्‍लड़प्रेशर घटता है। वैसे आंवला में विटामिन सी होता है जो रक्‍तवहिकाओं यानि ब्‍लड़ वैसेल्‍स को फैलाने में मदद करता है और इससे ब्‍लड़प्रेशर कम करने में मदद मिलती है। आवंला, त्रिफला का महत्‍वपूर्ण घटक है जो व्‍यवसायिक रूप से उपलब्‍ध है।
4) मूली – यह एक साधारण सब्‍जी है जो हर भारतीय घर के किचेन में मिलती है। इसे खाने से ब्‍लड़प्रेशर की बढ़ने वाली समस्‍या का निदान संभव है। इसे पकाकर या कच्‍चा खाने से बॉडी में उच्‍च मात्रा में मिनरल पौटेशियम पहुंचता है जो हाई – सोडियम डाईट के कारण बढ़ने वाले ब्‍लड़प्रेशर पर असर ड़ालता है।
5) तिल – हाल ही के अध्‍ययनों में पता चला है कि तिल का तेल और चावल की भूसी का तेल एक शानदार कॉम्‍बीनेशन है, जो हाइपरटेंशन वाले मरीजों के ब्‍लड़प्रेशर को कम करता है। और माना जाता है कि ब्‍लड़प्रेशर कम करने वाली दवाईयों से ज्‍यादा बेहतर होता है।
6) फ्लैक्‍ससीड या अलसी – फ्लैक्‍ससीड या लाइनसीड में एल्‍फा लिनोनेलिक एसिड बहुतायत में पाया जाता है जो कि एक प्रकार का महत्‍वपूर्ण ओमेगा – 3 फैटी एसिड है। कई अध्‍ययनों में भी पता चला है कि जिन लोगों को हाइपरटेंशन की शिकायत होती है उन्‍हे अपने भोजन में अलसी का इस्‍तेमाल शुरू करना चाहिए। इसमें कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा भी बहुत ज्‍यादा नहीं होती है और ब्‍लड़प्रेशर भी कम हो जाता है।
7) इलायची – बायोकैमिस्‍ट्री और बायोफिजिक्‍स के एक भारतीय जर्नल में एक अध्‍ययन प्रकाशित किया गया जिसमें बताया गया कि बेसिक हाइपरटेंशन के 20 लोग शामिल थे, जिन्‍हे 3 ग्राम इलायची पाउडर दिया गया। तीन महीने खत्‍म होने के बाद, उन सभी लोगों को अच्‍छा फील हुआ और इलायची के 3 ग्राम सेवन से उनको कोई साइडइफेक्‍ट भी नहीं हुआ। इसके अलावा, अध्‍ययन में यह भी बताया गया कि इससे ब्‍लड़प्रेशर भी प्रभावी ढंग से कम होता है। इससे एंटी ऑक्‍सीडेंट की स्थिति में भी सुधार होता है जबकि इसके सेवन से फाइब्रिनोजेन के स्‍तर में बिना फेरबदल हुए रक्‍त के थक्‍के भी टूट जाते है।
8) प्‍याज – प्‍याज में क्‍योरसेटिन होता है, एक ऐसा ऑक्‍सीडेंट फ्लेवेनॉल जो दिल को बीमारियों से अटैक पड़ने बचाता है।
9) दालचीनी – दालचीनी केवल इंसान को केवल दिल की बीमारियों से नहीं बल्कि डायबटीज से बचाता है। ओहाई के एप्‍लाईड हेल्‍थ सेंटर में 22 लोगों पर अध्‍ययन किया गया, जिनमें से आधे लोगों को 250 ग्राम पानी में दालचीनी को दिया गया जबकि आधे लोगों को कुछ और दिया गया। बाद में यह पता चला कि जिन लोगों ने दालचीनी का घोल पिया था, उनके शरीर में एंटीऑक्‍सीडेंट की मात्रा ज्‍यादा अच्‍छी थी और ब्‍लड सुगर भी कम थी।
अधिक जानकारीके लिए --http://ayurveda-foryou.com/treat/hypertension.html

सोमवार, 16 नवंबर 2015

सौंदर्य के लिए केले के फायदे

सौंदर्य के लिए केला बहुत ही फायदेमंद होता है.
1] चेहरे की झुर्रियों के लिए केला बहुत ही फायदेमंद होता है.

इसके लिए 1 पका हुआ केला लीजिये और इसे अच्छी तरह मसल लीजिये.
अब इसमें 1 चम्मच शहद और 10 बूंद जैतून के तेल की डालकर अच्छी तरह मिला लीजिए.
केले के इस फेस पैक को चेहरे व गर्दन पर लगाकर 15 मिनट के लिए छोड़ दीजिए और फिर सादे पानी से धो लीजिए.
ऐसा सप्ताह में 2 बार करने से चेहरे की झुर्रियां खत्म हो जाती हैं और चेहरा चमकने लगता है.

2] बालों के कंडीशनर के लिए भी केले का इस्तेमाल किया जाता है.

इसके लिए 1 पके हुए केले को काट लीजिए.
इसमें 1 छोटा चम्मच शहद, 1 बड़ा चम्मच दही और 1 चम्मच दूध डालकर इस मिश्रण को मिक्सी में पीस लीजिये.
पहले हल्के गर्म पानी से बालों को धो लीजिए फिर इस कंडीशनर को बालों में अच्छी तरह लगा कर Shower Cap पहन लीजिये.
1 घंटे इसे लगा रहने दीजिए और फिर पानी से धो लीजिये.
सप्ताह में 1 बार इस कंडीशनर को लगाने से बालों में चमक आ जाती है.


3] केला एक बहुत अच्छे Cleanser का भी काम करता है.

इसके लिए एक पका हुआ केला काट लीजिए.
इसमें 4 छोटे चम्मच नीबू का रस और बीज निकला हुआ 1/2 खीरा काटकर इसे मिक्सी में पीस कर पेस्ट बना लीजिए.
इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर 1/2 घंटे के लिए छोड़ दीजिए और फिर हल्के गर्म पानी से धो लीजिए.
एक दिन छोड़कर एक दिन ऐसा करने से चेहरा साफ और सुंदर दिखने लगता है साथ ही साथ कील – मुहाँसों से भी छुटकारा मिलता है.

4] शुष्क त्वचा के लिए केला एक बहुत बढ़िया औषधि है.

इसके लिए 1 केले को मसल लीजिये.
इसमें 2 चम्मच दूध की मलाई डालकर अच्छी तरह मिला लीजिए.
इस पेस्ट को चेहरे, गर्दन और हाथों पर लगाकर सूखने दीजिए और फिर पानी से धो लीजिए.
रोज़ाना ऐसा करने से शुष्क त्वचा ठीक हो जाती है और सुन्दरता भी बढ़ने लगती है.


5] टूटते बालों के लिए केले का प्रयोग किया जाये तो बाल मजबूत होकर टूटना बंद हो जाते हैं.

यदि बाल जल्दी-जल्दी टूटते हों तो केले के इस प्रयोग से आप अपने बालों को फिर से मजबूती दे सकते हैं.
1 पके हुए केले का गूदा लीजिए, इसमें 1/2 कटोरी नीबू का रस डालकर अच्छी तरह मिला लीजिए.
इसे बालों की जड़ों में लगाकर 1/2 घंटे के लिए छोड़ दीजिए और फिर हल्के गर्म पानी से बाल धो लीजिए.
ऐसा सप्ताह में 2 बार करना चाहिये. इससे बाल टूटना बन्द होकर बाल मजबूत हो जाते हैं.

मंगलवार, 18 अगस्त 2015

शुक्रवार, 13 जून 2014

गिलोयका उपयोगी योग -गिलोयघनवटी

- fresh Giloy  wash the stalks thoroughly cleaned. Now the small - small pieces and make Yvkut, now a clean - clean brass or iron in the pan, pour water four times, while the remaining four parts of the decoction three - four times Kpd Drain well, it now Other Clean - clean dishes Pakayen on low flame until it should be slightly thick, then it should be able to make a shot from the fires Uthar bike, now its 250 mg mg tablets are dried in the sun to keep making sure that oneGiloygnvti Designed, feel free to use any type of fever, leukorrhea, indigestion, Animic and for vulnerable patients, it is not a safe alternative medicine.
http://ayurveda-foryou.com/ayurveda_herb/guduchi.html

बुधवार, 11 जून 2014

तुलसी



तुलसी में गजब की रोगनाशक शक्ति है। विशेषकर सर्दी, खांसी व बुखार में यह अचूक दवा का काम करती है। इसीलिए भारतीय आयुर्वेद के सबसे प्रमुख ग्रंथ चरक संहिता में कहा गया है। 

- तुलसी हिचकी, खांसी,जहर का प्रभाव व पसली का दर्द मिटाने वाली है। इससे पित्त की वृद्धि और दूषित वायु खत्म होती है। यह दूर्गंध भी दूर करती है। 

- तुलसी कड़वे व तीखे स्वाद वाली दिल के लिए लाभकारी, त्वचा रोगों में फायदेमंद, पाचन शक्ति बढ़ाने वाली और मूत्र से संबंधित बीमारियों को मिटाने वाली है। यह कफ और वात से संबंधित बीमारियों को भी ठीक करती है। 

- तुलसी कड़वे व तीखे स्वाद वाली कफ, खांसी, हिचकी, उल्टी, कृमि, दुर्गंध, हर तरह के दर्द, कोढ़ और आंखों की बीमारी में लाभकारी है। तुलसी को भगवान के प्रसाद में रखकर ग्रहण करने की भी परंपरा है, ताकि यह अपने प्राकृतिक स्वरूप में ही शरीर के अंदर पहुंचे और शरीर में किसी तरह की आंतरिक समस्या पैदा हो रही हो तो उसे खत्म कर दे। शरीर में किसी भी तरह के दूषित तत्व के एकत्र हो जाने पर तुलसी सबसे बेहतरीन दवा के रूप में काम करती है। सबसे बड़ा फायदा ये कि इसे खाने से कोई रिएक्शन नहीं होता है। 

तुलसी की मुख्य जातियां- तुलसी की मुख्यत: दो प्रजातियां अधिकांश घरों में लगाई जाती हैं। इन्हें रामा और श्यामा कहा जाता है। 

- रामा के पत्तों का रंग हल्का होता है। इसलिए इसे गौरी कहा जाता है। 

- श्यामा तुलसी के पत्तों का रंग काला होता है। इसमें कफनाशक गुण होते हैं। यही कारण है कि इसे दवा के रूप में अधिक उपयोग में लाया जाता है। 

- तुलसी की एक जाति वन तुलसी भी होती है। इसमें जबरदस्त जहरनाशक प्रभाव पाया जाता है, लेकिन इसे घरों में बहुत कम लगाया जाता है। आंखों के रोग, कोढ़ और प्रसव में परेशानी जैसी समस्याओं में यह रामबाण दवा है। 

- एक अन्य जाति मरूवक है, जो कम ही पाई जाती है। राजमार्तण्ड ग्रंथ के अनुसार किसी भी तरह का घाव हो जाने पर इसका रस बेहतरीन दवा की तरह काम करता है। 

मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी - मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी, जैसे मलेरिया में तुलसी एक कारगर औषधि है। तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर पीने से मलेरिया जल्दी ठीक हो जाता है। जुकाम के कारण आने वाले बुखार में भी तुलसी के पत्तों के रस का सेवन करना चाहिए। इससे बुखार में आराम मिलता है। शरीर टूट रहा हो या जब लग रहा हो कि बुखार आने वाला है तो पुदीने का रस और तुलसी का रस बराबर मात्रा में मिलाकर थोड़ा गुड़ डालकर सेवन करें, आराम मिलेगा। 

- साधारण खांसी में तुलसी के पत्तों और अडूसा के पत्तों को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से बहुत जल्दी लाभ होता है। 

- तुलसी व अदरक का रस बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से खांसी में बहुत जल्दी आराम मिलता है। 

- तुलसी के रस में मुलहटी व थोड़ा-सा शहद मिलाकर लेने से खांसी की परेशानी दूर हो जाती है। 

- चार-पांच लौंग भूनकर तुलसी के पत्तों के रस में मिलाकर लेने से खांसी में तुरंत लाभ होता है। 

- शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड़ के साथ पीसकर नि:संतान महिला को खिलाया जाए तो जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है। 
tulasi

- किडनी की पथरी में तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 माह सेवन करने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाती है। 
- फ्लू रोग में तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से लाभ होता है। 

- तुलसी थकान मिटाने वाली एक औषधि है। बहुत थकान होने पर तुलसी की पत्तियों और मंजरी के सेवन से थकान दूर हो जाती है। 

- प्रतिदिन 4- 5 बार तुलसी की 6-8 पत्तियों को चबाने से कुछ ही दिनों में माइग्रेन की समस्या में आराम मिलने लगता है। 

- तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है। इससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है। 

- तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है। 

- तुलसी के पत्तों को तांबे के पानी से भरे बर्तन में डालें। कम से कम एक-सवा घंटे पत्तों को पानी में रखा रहने दें। यह पानी पीने से कई बीमारियां पास नहीं आतीं। 

- दिल की बीमारी में यह अमृत है। यह खून में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है। दिल की बीमारी से ग्रस्त लोगों को तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए।
Tulsi