गुरुवार, 10 मार्च 2016

पथरी (किडनी स्टोन ) के लिए रामबाण कुलत्थ की दाल

लेटिन मे डोलीचस बाइफ्लोरस के नाम से पहचान रखनेवाली यह दाल हार्स ग्राम के नाम से भी जानी जाती है। भारत,नेपाल सहित अधिकाँश एशियाई देशों में सदियों से इसकी दाल का प्रयोग पथरी(किडनी स्टोन) में किया जाता रहा है।उष्ण प्रवृति का होने के कारण जाड़ों में अक्सर पहाड़ के लोग इसकी दाल का सूप पीते हैं।यह Iron का एक अच्छा स्रोत है तथा किडनी सहित उदर रोगों में भी काफी फायदेमंद होता है।
गहत की दाल को बनाने की विधि:
1 प्याज
6 लहशुन की कलियां
1 छोटा टुकड़ा अदरक
1 चुटकी हींग
1/2 चम्मच हल्दी पाउडर
1 चम्मच धनिया पाउडर
1/2चम्मच मिर्च पाउडर (आवश्यकतानुसार)
नमक (आवश्यकतानुसार)
1चम्मच गरम मसाला
सबसे पहले थोड़ी मात्रा में तेल को गर्म करें इसम पानी में भिंगोई गहत की दाल को हल्की आंच में पकाएं इसके बाद इसमें उपरोक्त मात्रा में हींग ,प्याज ,अदरक,लहशुन आदि डालें,तत्पश्चात 1 मिनट के बाद सारे मसाले नमक और मिर्च उपयुक्त मात्रा में मिलाएं और 1 मिनट तक भूनें इसके बाद इस 10 मिनट तक प्रेसर कुक करें,प्रेसर खुद रिलीज होने दें अब इसके ऊपर धनिये के पत्ते की बारीक कटे टुकड़ों को छिड़क लें और इसे भी मिला लें।पारंपरिक पहाड़ी गहत दाल तैयार हो गयी।इसे अन्य तरीकों से भी बनाया जा सकता है।

वैज्ञानिक इसे एन्टीहायपरग्लायसेमिक गुणों से युक्त मानते हैं साथ ही इसे Insulin के resistance को कम करनेवाला भी मानते हैं।इसके बीज के छिलकों में antioxidant गुण भी पाये जाते हैं Indian Journal of Medical Research में प्रकाशित शोध के अनुसार यह किडनी स्टोन को डिजोल्व करने के गुणों से युक्त एक दाल है।आयुर्वेदिक चिकित्सक भी इसकी दाल का प्रयोग अश्मरी,मूत्रल एवं Amenorrhea में करते हैं।NCBI में प्रकाशित एक शोध के अनुसार यह वजन को नियंत्रित करने के गुणों से युक्त प्रभाव भी रखती है।

पथरी (किडनी स्टोन ) के लिए एक  प्रयोग काफी उपयोगी है आप प्रयोग कराएं निश्चित लाभ मिलेगा
इसे आप क ख ग से याद कर सकते हैं
क-कुलत्थ के बीज/ककड़ी बीज
ख-खीरा बीज
ग-गोक्षुर बीज
इन सभी को सममात्रा में यवकूट कर चूर्ण बना लें और पथरी(किडनी स्टोन) के रोगी में 5 ग्राम प्रातः सायं की मात्रा में 1 महीने तक दें ।इस अवधि में रोगी को प्रचुर मात्रा में पानी लेने को कहें ताकि फोर्स्ड डाई यूरेसिस होता रहे ।

शिलाजीत के साथ इसकी विपरीत प्रकृति होने के कारण इसे शिलाजीत सेवन काल में नही देना चाहिए।

शुक्रवार, 4 मार्च 2016

मधुमेह का आयुर्वेदिक इलाज

विजयसार नाम से एक लकड़ी है ये हमारे भारत में मध्य प्रदेश से लेकर पूरे दक्षिण भारत मे पाया जाता है। इसकी लकड़ी का रंग हल्का लाल रंग से गहरे लाल रंग का होता है। यह दवा मधुमेह रोगियों के लिये तो प्रभावी है।

विजयसार को ना केवल आयुर्वेद बल्कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी डायबिटीज में बहुत उपयोगी मानता है इसके लिए विजयसार की लकड़ी से बने गिलास में रात में पानी भर कर रख दिया जाता है सुबह भूखे पेट इस पानी को पी लिया जाता है विजयसार की लकड़ी में पाये जाने वाले तत्व रक्त में इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाने में सहायता करते हैं .

विजयसार की लकड़ी के टुकड़े बाजार से ले आए, जिसमे घुन ना लगा हो। इसे सूखे कपड़े से साफ कर ले। अगर टुकड़े बड़े है तो उन्हे तोड़ कर छोटे- छोटे- 1/4 -1/2 सेंटीमीटर या और भी छोटे टुकड़े बना ले।फिर आप एक मिट्टी का बर्तन ले और इस लकड़ी के छोटे छोटे टुकड़े लगभग पच्चीस ग्राम रात को दो कप या एक गिलास पानी में डाल दे । सुबह तक पानी का रंग लाल गहरा हो जाएगा ये पानी आप खाली पेट छानकर पी ले और दुबारा आप उसी लकड़ी को उतने ही पानी में डाल दे शाम को इस पानी को उबाल कर छान ले। फिर इसे ठंडा होने पर पी ले।
इसकी मात्रा रोग के अनुसार घटा या बढ़ा भी सकते है अगर आप अग्रेजी दवा का प्रयोग कर रहे है तो एक दम न बंद करे बस धीरे -धीरे कम करते जाए अगर आप इंस्युलीन के इंजेक्शन प्रयोग करते है वह 1 सप्ताह बाद इंजेक्शन की मात्रा कम कर दे। हर सप्ताह मे इंस्युलीन की मात्रा 2-3 यूनिट कम कर दे। विजयसार की लकड़ी में पाये जाने वाले तत्व रक्त में इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाने में सहायता करते हैं l

औषधीय गुण :
– मधुमेह को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
– उच्च रक्त-चाप को नियन्त्रित करने में सहायता करता है।
– अम्ल-पित्त में भी लाभ देता है।
– जोडों के दर्द में लाभ देता है।
– हाथ-पैरों के कम्पन में भी बहुत लाभदायक है।
– शरीर में बधी हुई चर्बी को कम करके, वजन और मोटापे को भी कम करने में सहायक है।
– त्वचा के कई रोगों, जैसे खाज-खुजली, बार-2 फोडे-फिंसी होते हों, उनमें भी लाभ देता है।
– प्रमेह (धातु रोग) में भी अचूक है।
– इसके नियमित सेवन से जोड़ों की कड़- कड़ बंद होती है . अस्थियाँ मजबूत होती है .

मधुमेह के  आयुर्वेदिक इलाज संबंधी आधिक जानकारिकेलिए पढें - Ebook - Ayurvedic Cure of Diabetes

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

स्वास्थ्य रक्षक नींबू

नीबू में ए, बी और सी विटामिनों की भरपूर मात्रा है-विटामिन ए अगर एक भाग है तो विटामिन बी दो भाग और विटामिन सी तीन भाग। इसमें -पोटेशियम, लोहा, सोडियम, मैगनेशियम, तांबा, फास्फोरस और क्लोरीन तत्त्व तो हैं ही, प्रोटीन, वसा और कार्बोज भी पर्याप्त मात्रा में हैं। विटामिन सी से भरपूर नीबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही एंटी आक्सीडेंट का काम भी करता है और कोलेस्ट्राल भी कम करता है। नीबू में मौजूद विटामिन सी और पोटेशियम घुलनशील होते हैं, जिसके कारण ज्यादा मात्रा में इसका सेवन भी नुकसानदायक नहीं होता।

नींबू के फायदे --
* गर्म पानी में नींबू का रस रात्रि में लेने से कब्ज दूर होती है।
* नींबू के रस में अदरक का रस मिलाकर और थोड़ी सी शक्कर मिलाकर पीने से पेट दर्द में राहत मिलती है।
* नींबू का रस पानी में मिलाकर गर्मियों में पीने से गर्मी शांत होती है।
* स्वस्थ व्यक्ति भी नियमित नींबू का सेवन करता रहे तो रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।
* भोजनोपरान्त नींबू का टुकड़ा चूसने से पाचन क्रिया में मदद मिलती है।
* विटामिन सी की प्रचुरता के कारण गुर्दें, आंतें और फेफड़े ठीक ठाक रहते हैं।
* पीलिया के रोगियों को नींबू का रस, पानी और शक्कर मिला कर देने से लाभ होता है।
* चक्कर और उल्टी आने पर नींबू के ऊपर नमक और हल्की सी काली मिर्च बुरक कर चूसने से लाभ मिलता है।
* सब्जियों और दालों पर नींबू निचोड़ कर खाने से सब्जियों के स्वाद और पोषकता में वृध्दि होती है।
* नींबू का रस पूरे शरीर की सफाई करता है और पेट के कीड़ों को भी मारता है।
* नींबू दांतों की भी सुरक्षा करता है। नींबू के रस में थोड़ा सा नमक और दो बूंदें सरसों के तेल मिलाकर दांतों पर रगड़ने से दांत चमकदार होते हैं।
* हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के रोगियों को दिन में तीन बार नींबू पानी पीना लाभदायक है।
* नींबू के रस में सेंधा नमक मिलाकर कुछ दिन नियमित पीने से पथरी गल जाती है।
* नींबू की पत्तियां चूसने से हिचकी बंद हो जाती है।
* नींबू के रस में काली मिर्च, धनिया और भुना हुआ जीरा मिलाकर सेवन करने से पेट के विकार दूर होते हैं।
* नींबू के रस से दूध फाड़कर पनीर बनाया जाए तो पनीर अधिक पौष्टिक होता है।

शुक्रवार, 22 जनवरी 2016

​​“अनिमिया ​​ ​और कुपोषण मुक्त भारत​”  ​​​लोक आंदोलन

हम, भारत् में आज सर्वाधिक लोग अशक्त और अनिमिआसे ग्रस्त है. आओ इसे बदले.

महाभारत​के ​ पांड​वोंके ​​ माता पिता  पांडू और कुंती    ---
​महाभारत​के ​ पांड​वोंके ​​ पिता   ​ सफेद थे. उनमे   रक्त​की ​ कमी​​ थी. उन्हे  पांडुरोग ​था. इसीलिये  उनका नाम  पांडु ​ था. आज भारत​मे  ​सर्वा​धिक  लो​गोंको   ​यही बिमारी है. ।​ ​सर्वा​धिक  लो​ग ​ पांडु है. ​ सरकार ​इसे घटानेके लिये  1970 ​से  विशेष कार्यक्रम ​चालती है।  स​ब डॉक्टर ​सबको इलाज करते है.फिरभी  आज सर्वाधिक लोगोंको  यह बिमारी है. 5 ​मे से ३,४   भारती​योंको ​ ​यह बिमारी है.। इसके कारण हम अशक्त है.अल्पायुषी है. ​और हमे यह मालूम नहिं. ​मालूम नहिं ​यह ​भी ​मालूम नहिं. आओ इसे जाने और  सबको बताये. यह पुण्यका काम है. ​यह सर्वोत्तम  देशसेवा, लोकसेवा ​है ।​  ​हिमोग्लोबिन​ से खून लाल होता है.  उसकी ​ की कमी को  ​, पांडुरोग,​ रक्त अल्पता ​​ कहते है.  ​1 ग्राम ​​​​हिमोग्लोबिन ​यह 1 ग्राम प्रथिन​,​ ​और बिलकुल  थोडे लोह,व फॉलिक एसिड ​और  बी 12 ​, इन दो  ​​जीवन स​त्वोंसे बनता  है. काफी लोगोंमे इन  चारो चीजोंका  अभाव है.ये कहानीयां  पढिये और  देशको अनिमिया मुक्त किजिये.
​कहानी
 लोह निशा​की. उसके जुबान से​​:---

 निशा ​दीदी  सरकारी ​डिप्लोमाधारी परिचारिका ​है. निशा​ कहती है,,"​ मेरे बदनमे  खून कम था. हिमोग्लोवीन ९ ग्राम ​था.  डॉक्टर​ने लोह​ की गोली दी.    मुझे जुलाब ​लगे.​मैने गोली बंद ​दी.​लोहे की कढाई मे  खाना बनाना शुरू किया.मै  ठीक हो गई. मेरा खून बढा. इसके बाद मैने ३ ​बार  रक्त दान  ​किया. अब  मेरा  हिमोग्लोबिन १३ ​ ग्राम है.​ ​अच्छा है.​
सीख १. ​हम सबने लोहेकी कढाई में खाना पकाना चाहिये. ​

वंदना सरकार नागपूर की कहानी

 मेरे पतीको केंसर [कर्करोग] है. वे उसकी दवा खाते ही. उनका खून घटता है. हम हर बार उन्हे  २ बोतल खून देते है. निशासे सिख कर मैने लोहे की कढाई मी खान बनाना शुरू किया.अब  उनका हिमोग्लोबिन ९ से १३ हो गया है. मै सबको संक्रांतीमे लोहे की कढाई भेट दुंगी.

माधुरी ताई प्रवीण राउत, बंबई, ने इस संक्रांती को सबको लोहेकी  कडाई देनेका तय किया है.

​​डॉ. रमेश चेलन ​का  ​अभ्यास ​​प्रसिद्ध​ ​​है.कि ​९७% ​ बच्चे और माताओमे ​लोह​  की ​ कमी ​है .  अनिमिआ ​है. पुरुशोंमे भी ऐसा ही  होगा.
लोह कमी के   दुष्परिणाम ​ऐसे है.१. गर्भपात, ​होना २.  छो​टे , मंद बुद्धी ​बच्चे  होना.3 शिक्षण क्षमता ​​कम ​होना. कार्य क्षमता ​​कम हो​ती  है.५. हिमोग्लोबिन ​​कम हो​ता   है. ​इसे हम  अनिमिआ ​कहते है.  १ ग्राम हिमोग्लोबिन कम​ होनेपर ​२% कार्य क्षमता घट​ती ​है.आओ हम इसे  २०१६ ​मे  बदलेङ्गे. यह जानकारी सब को  देकर.
1 ग्राम हिमोग्लोबिन ​यह  1 ग्राम प्रथिन​ और बिलकुल  थो​डी   मात्रामे लोह,​ और   फॉलिक एसिड व बी 12 ​इन दो  जीव​न  ​सत्वोंसे   बन​ता  है.  ​काफी लोगोंमे इन सबका अभाव है.
​क्या मुझमे इन का अभाव है ? कैसे जाने? मुठ्ठी बंद करो. अब अपनी हाथ की  उंगलीओंके जोडोंको देखो.
ये अगर काले  है,, तो हममे फोलिक एसिड  और बी १२ का अभाव है. उन्हे लेनेपर काला रंग  चल जाता है. हमारा गया.    फॉलिक एसिड :​ यह पता सब्जी और फलोंसे  मिलता है. ​उसे  काम करते समय, या समय मिलने  पर दिनभर खाइयॆ. लाभ होगा. एक करमचंद जासूस हरदम गजर खात था. उसी तरह. ​हमे  रोज 1 मिलिग्रॅम फॉलीक एसिड ​लागता है. 5 मिलीग्रॅम ​की  गो​ली  औषधी दुकान​मे ​ मिल​ती  है.।​१ गो​ली   बाट कर घरके सब लोग रोज ​ले. ​​का​ले दाग जाने  तक ले.
बी 12 जीवनसत्व:
दुध​मे  ​बी 12 ​है.​दहीमे दुधसे  ज्यादा बी 12 ​है.
सब दुध का दही बनाइये. और  खाइये.   संसारमे सर्वाधिक भारत दुध मे होता है.
 बी 12 सिर्फ  फक्त मांसाहार​से ​ मि​लता है। शाकाहारी ​और हफ्तेमे १ बार  मांसाहार ​करनेवाले लोगोंमे  बी 12 ​का  अभाव  ​होता है. इससे दिमाग और   नर्वज (नाडी, माजातंतू) ​को तकलीफ  होती है.  ​पैरमे  गोले आना , दिमागने   काम कम करना   ​​आदी दिमाग की कोई भी तकलीफ हो तो बी १२ लेकर देखिये. लाभ हो सकताहै. मिथाइल कोबाल अमीन ​नामसे लिजिये। 1000 मायक्रो ग्राम ​का  इंजेक्शन ​लिजिये.  ​हर हफ्ता एक  ऐसा  4 ​हफ्ता लिजिये. या ​ ​​उन्गलीके का​ले दाग जाने  तक लिजिये. परदेश​ मे  रहने वाले खूप भारतीय​ लोगोंको उनके  ​ डॉक्टर ​ये  इंजेक्शन ​हर  6 महि​नेमे  एक बार देते है.
लोह, फॉलिक एसिड, बी 12 ​लेकर र्भी , प्रथिन​ ​कम​ ​​होनेके कारण  अशक्त लो​गोन्मे  हिमोग्लोबिन ​ज्यादा बढता नही. रोज ​अनाज कम पडनेसे बच्चे और लोग  ​दुबले  अशक्त हो​ते है. 1 ग्राम हिमोग्लोबिन ब​नेको  1 ग्राम प्रथिन लगता​ है. ​। ​​दुबले  अशक्त​ लोगोंको रोज खानेमे  25 % तक प्रथिन​ [प्रोटीन्स] ​कम पड​ते है. इलाज: ​दुबले  अशक्त​ लोगोंको जेबमे   24 ​घंटा चना , मुंग फल्ली भरकर रखिये.

घरमे एक कोनेमे  चना , मुंग फल्ली, गाजर आदी हरदम भरकर रखिये. दुबले  अशक्त​ लोगोंने उसे दिनभर खाना चाहिये.
उन्हे ज्यादा प्रथिन मिलेंगे.  वे  सशक्त ​बनेङ्गे. खून भी बढेगा . ​चना , मुंग फल्ली ​ना हो तो जो चीज घरमे है उसे दिजिये.  ​​कच्चा चना दाल  दिजिये. सब पचता  है ।महाराष्ट्र मे  सरकार, हमारी सलाह के अनुसार, सबको  एक कोनेमे  चना , मुंग फल्ली, रखनेको कहती है. इससे  महाराष्ट्रातील कमजोर बच्चोंका प्रमाण घटा है.  भारतके  बडे राज्योंके तुलनामे महाराष्ट्रमें कमजोर बच्चोंका प्रमाण अब सबसे कम है.
सावधान: ​बच्चोंको  दूध ​ना दे. दुधमे लोह  ​नही के बराबर है.  दूध ​दुसरे अन्न के लोह को भी खा लेता है. अमेरि​कामे पहले साल बच्चेको दुध देना  मना है. ​ ​​
​यह  लो​गोन्का लोगोन्के लिये ,  अनिमिआ मुक्ती ​आंदोलन है. 

रविवार, 17 जनवरी 2016

उच्‍च रक्‍तचाप या हाइपरटेंशन

उच्‍च रक्‍तचाप से दिल की बीमारी, स्‍ट्रोक और यहां तक कि गुर्दे की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। उच्‍च रक्‍तचाप के लिए मेडीकल पर बहुत ज्‍यादा भरोसा करना सही है, इससे आप ठीक भी हो जाएंगे, लेकिन अधिक समय तक यह उपचार लाभकारी नहीं होता है। जब तक आप दवा खाते रहेगें, तब तक आराम रहेगा। बाजार में उच्‍च रक्‍तचाप के लिए कई दवाईयां उपलब्‍ध हैं, जो हाई ब्‍लड़ – प्रेशर को कंट्रोल कर लेती है लेकिन ज्‍यादा दवाई खाना भी सेहत के घातक है, एक समय के बाद दवाईयों का असर धीमा पड़ने लगता है। इसलिए उच्‍च रक्‍तचाप के मामले में हर्बल उपचार भी लाभकारी होता है।
कई जड़ी – बूटियों / पारंपरिक चिकित्‍सा
1) लहसुन – लहसुन उन रोगियों के लिए लाभकारी होता है जिनका ब्‍लड़प्रेशर हल्‍का सा बढ़ा रहता है। ऐसा माना जाता है कि लहसुन में एलिसीन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्‍साइड के उत्‍पादन हो बढ़ाता है और मांसपेशियों की धमनियों को आराम पहुंचाता है और ब्‍लड़प्रेशर के डायलोस्टिक और सिस्‍टोलिक सिस्‍टम में भी राहत पहुंचाता है।
2) सहजन – सहजन का एक नाम ड्रम स्‍टीक भी होता है। इसमें भारी मात्रा में प्रोटीन और गुणकारी विटामिन और खनिज लवण पाएं जाते है। अध्‍ययन से पता चला है कि इस पेड़ के पत्‍तों के अर्क को पीने से ब्‍लड़प्रेशर के सिस्‍टोलिक और डायलोस्टिक पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है। इसे खाने का सबसे अच्‍छा तरीका इसे मसूर की दाल के साथ पकाकर खाना है।
3) आंवला – परम्‍परागत तौर पर माना जाता है कि आंवला से ब्‍लड़प्रेशर घटता है। वैसे आंवला में विटामिन सी होता है जो रक्‍तवहिकाओं यानि ब्‍लड़ वैसेल्‍स को फैलाने में मदद करता है और इससे ब्‍लड़प्रेशर कम करने में मदद मिलती है। आवंला, त्रिफला का महत्‍वपूर्ण घटक है जो व्‍यवसायिक रूप से उपलब्‍ध है।
4) मूली – यह एक साधारण सब्‍जी है जो हर भारतीय घर के किचेन में मिलती है। इसे खाने से ब्‍लड़प्रेशर की बढ़ने वाली समस्‍या का निदान संभव है। इसे पकाकर या कच्‍चा खाने से बॉडी में उच्‍च मात्रा में मिनरल पौटेशियम पहुंचता है जो हाई – सोडियम डाईट के कारण बढ़ने वाले ब्‍लड़प्रेशर पर असर ड़ालता है।
5) तिल – हाल ही के अध्‍ययनों में पता चला है कि तिल का तेल और चावल की भूसी का तेल एक शानदार कॉम्‍बीनेशन है, जो हाइपरटेंशन वाले मरीजों के ब्‍लड़प्रेशर को कम करता है। और माना जाता है कि ब्‍लड़प्रेशर कम करने वाली दवाईयों से ज्‍यादा बेहतर होता है।
6) फ्लैक्‍ससीड या अलसी – फ्लैक्‍ससीड या लाइनसीड में एल्‍फा लिनोनेलिक एसिड बहुतायत में पाया जाता है जो कि एक प्रकार का महत्‍वपूर्ण ओमेगा – 3 फैटी एसिड है। कई अध्‍ययनों में भी पता चला है कि जिन लोगों को हाइपरटेंशन की शिकायत होती है उन्‍हे अपने भोजन में अलसी का इस्‍तेमाल शुरू करना चाहिए। इसमें कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा भी बहुत ज्‍यादा नहीं होती है और ब्‍लड़प्रेशर भी कम हो जाता है।
7) इलायची – बायोकैमिस्‍ट्री और बायोफिजिक्‍स के एक भारतीय जर्नल में एक अध्‍ययन प्रकाशित किया गया जिसमें बताया गया कि बेसिक हाइपरटेंशन के 20 लोग शामिल थे, जिन्‍हे 3 ग्राम इलायची पाउडर दिया गया। तीन महीने खत्‍म होने के बाद, उन सभी लोगों को अच्‍छा फील हुआ और इलायची के 3 ग्राम सेवन से उनको कोई साइडइफेक्‍ट भी नहीं हुआ। इसके अलावा, अध्‍ययन में यह भी बताया गया कि इससे ब्‍लड़प्रेशर भी प्रभावी ढंग से कम होता है। इससे एंटी ऑक्‍सीडेंट की स्थिति में भी सुधार होता है जबकि इसके सेवन से फाइब्रिनोजेन के स्‍तर में बिना फेरबदल हुए रक्‍त के थक्‍के भी टूट जाते है।
8) प्‍याज – प्‍याज में क्‍योरसेटिन होता है, एक ऐसा ऑक्‍सीडेंट फ्लेवेनॉल जो दिल को बीमारियों से अटैक पड़ने बचाता है।
9) दालचीनी – दालचीनी केवल इंसान को केवल दिल की बीमारियों से नहीं बल्कि डायबटीज से बचाता है। ओहाई के एप्‍लाईड हेल्‍थ सेंटर में 22 लोगों पर अध्‍ययन किया गया, जिनमें से आधे लोगों को 250 ग्राम पानी में दालचीनी को दिया गया जबकि आधे लोगों को कुछ और दिया गया। बाद में यह पता चला कि जिन लोगों ने दालचीनी का घोल पिया था, उनके शरीर में एंटीऑक्‍सीडेंट की मात्रा ज्‍यादा अच्‍छी थी और ब्‍लड सुगर भी कम थी।
अधिक जानकारीके लिए --http://ayurveda-foryou.com/treat/hypertension.html

सोमवार, 16 नवंबर 2015

सौंदर्य के लिए केले के फायदे

सौंदर्य के लिए केला बहुत ही फायदेमंद होता है.
1] चेहरे की झुर्रियों के लिए केला बहुत ही फायदेमंद होता है.

इसके लिए 1 पका हुआ केला लीजिये और इसे अच्छी तरह मसल लीजिये.
अब इसमें 1 चम्मच शहद और 10 बूंद जैतून के तेल की डालकर अच्छी तरह मिला लीजिए.
केले के इस फेस पैक को चेहरे व गर्दन पर लगाकर 15 मिनट के लिए छोड़ दीजिए और फिर सादे पानी से धो लीजिए.
ऐसा सप्ताह में 2 बार करने से चेहरे की झुर्रियां खत्म हो जाती हैं और चेहरा चमकने लगता है.

2] बालों के कंडीशनर के लिए भी केले का इस्तेमाल किया जाता है.

इसके लिए 1 पके हुए केले को काट लीजिए.
इसमें 1 छोटा चम्मच शहद, 1 बड़ा चम्मच दही और 1 चम्मच दूध डालकर इस मिश्रण को मिक्सी में पीस लीजिये.
पहले हल्के गर्म पानी से बालों को धो लीजिए फिर इस कंडीशनर को बालों में अच्छी तरह लगा कर Shower Cap पहन लीजिये.
1 घंटे इसे लगा रहने दीजिए और फिर पानी से धो लीजिये.
सप्ताह में 1 बार इस कंडीशनर को लगाने से बालों में चमक आ जाती है.


3] केला एक बहुत अच्छे Cleanser का भी काम करता है.

इसके लिए एक पका हुआ केला काट लीजिए.
इसमें 4 छोटे चम्मच नीबू का रस और बीज निकला हुआ 1/2 खीरा काटकर इसे मिक्सी में पीस कर पेस्ट बना लीजिए.
इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर 1/2 घंटे के लिए छोड़ दीजिए और फिर हल्के गर्म पानी से धो लीजिए.
एक दिन छोड़कर एक दिन ऐसा करने से चेहरा साफ और सुंदर दिखने लगता है साथ ही साथ कील – मुहाँसों से भी छुटकारा मिलता है.

4] शुष्क त्वचा के लिए केला एक बहुत बढ़िया औषधि है.

इसके लिए 1 केले को मसल लीजिये.
इसमें 2 चम्मच दूध की मलाई डालकर अच्छी तरह मिला लीजिए.
इस पेस्ट को चेहरे, गर्दन और हाथों पर लगाकर सूखने दीजिए और फिर पानी से धो लीजिए.
रोज़ाना ऐसा करने से शुष्क त्वचा ठीक हो जाती है और सुन्दरता भी बढ़ने लगती है.


5] टूटते बालों के लिए केले का प्रयोग किया जाये तो बाल मजबूत होकर टूटना बंद हो जाते हैं.

यदि बाल जल्दी-जल्दी टूटते हों तो केले के इस प्रयोग से आप अपने बालों को फिर से मजबूती दे सकते हैं.
1 पके हुए केले का गूदा लीजिए, इसमें 1/2 कटोरी नीबू का रस डालकर अच्छी तरह मिला लीजिए.
इसे बालों की जड़ों में लगाकर 1/2 घंटे के लिए छोड़ दीजिए और फिर हल्के गर्म पानी से बाल धो लीजिए.
ऐसा सप्ताह में 2 बार करना चाहिये. इससे बाल टूटना बन्द होकर बाल मजबूत हो जाते हैं.