Saturday 17 October 2009

दिवाली

इस बार रूप चतुर्दशी और दिवाली का अनोखा संयोग बना है। तिथियों की घट-बढ़ के कारण 17 अक्टूबर को सुबह रूप चौदस और शाम को दीपावली मनेगी। ज्योतिषियों का कहना है कि दोनों पर्व एक साथ होने का संयोग 80 वर्षों बाद बना है। 17 अक्टूबर को रूप चतुर्दशी या नरक चतुर्दशी है और इसी दिन दोपहर में अमावस्या शुरू हो जाएगी। इसी कारण शाम को महालक्ष्मी पूजन किया जाएगा। चतुर्दशी के दिन दोपहर में 12 बजकर 27 मिनट से अमावस्या शुरू होगी। इससे पहले तक रूप चौदस मनाई जाएगी। पं. ओम वशिष्ठ के अनुसार दोनों पर्व एक ही दिन हैं। इस तरह का संयोग दुर्लभ है। शनिवार 17 अक्टूबर को दोपहर में अमावस्या शुरू होगी। उन्होंने बताया शनिवार को हस्त नक्षत्र में दीपावली पूजन होगा।

Dipawali

Monday 12 October 2009

हमारे सभी पाठकोंको दीपावली के शुभ अवसरपर तथा धन्वंतरी जयंती के अवसरपर हमारी ओरसे
हार्दिक शुभकामनाए!!

Monday 6 April 2009

अस्पॅरगस ए ट्रीट वेन कुक्ड राइट

अस्पॅरगस, फर्स्ट वेजिटेबल ऑफ स्प्रिंग, इस ऑल्सो वन ऑफ द मोस्ट हेल्तफुल. प्रिपेर्ड टेंडर्ली, अस्पॅरगस इस आ डेलिकेसी. बुत ओवरकुक्ड, लीके अन्य ग्रीन वेजिटेबल, इट कॅन बिकम स्लाइमी. मानी पीपल हू थिंक थे हटे अस्पॅरगस आक्च्युयली हॅव नेवेर हद इट प्रॉपर्ली प्रिपेर्ड. लर्न वेस तो रेलीश अस्पॅरगस, आंड योउ कॅन गेट थे फुल बेनेफिट ऑफ इट्स विटमिन्स अन्द आंटीयाक्सिडंट्स. थे एन्षियेंट ग्रीक्स, रोमांस आंड अरब्स ऑल रोट अबौट फीस्टिंग ओं अस्पॅरगस आंड बिलीव्ड इट वाज़ आन आफ्रोडीज़िक, एस्पेशली फॉर में, बिकॉज़ ऑफ इट्स शेप. ट्रडीशनल इंडियन मेडिसिन, ओर आयुर्वेदा, क्लेम्स अस्पॅरगस ऑल्सो हेल्प्स बॅलेन्स विमन'स हॉर्मोन्स. वाइल अस्पॅरगस' लिंक्स तो फर्टिलिटी आंड वरिलिटी हेवन'त बिन स्टडीड बाइ मॉडर्न साइंटिस्ट्स, योउ कुड आर्ग्यू तट अन्य डेलीशियस मील कॅन सेट आ रोमॅंटिक मूड. एन्ष्शेंट्स आंड मॉडर्न्स अलाइक अग्री तट अस्पॅरगस इस हेल्ती.

Wednesday 22 October 2008

धन त्रयोदशी – इसी दिन देवताओं के वैद्य धनवंतरि ऋषि अमृत कलश सहित सागर मंथन से प्रकट हुए थे । अतः इस दिन धनवंतरी जयंती मनायी जाती है । निरोग रहते हेतु उनका पूजन किया जाता है
हमारे सभी पाठकोंको धनवंतरी जयंतीकी हार्दिक शुभाकामनाये!!
सभी पाठकों को
'आयुर्वेद-आपकेलिये' (हिन्दी आयुर्वेद फॉर यू)
की तरफ से दीपावली व नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये.

Saturday 4 October 2008

लिप्सस्टिक से हो सकता है स्तन कैंसर!
न्यूयार्क, 7 दिसम्बर (आईएएनएस)। लिप्सस्टिक का इस्तेमाल करने वाली युवतियों और महिलाओं को सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि इसके इस्तेमाल से स्तन कैंसर का खतरा हो सकता है।
अमेरिका के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि लिप्सस्टिक और नेल वार्निश में जिस तरह के रसायन का इस्तेमाल किया जाता है वह ब्रेस्ट टिशू (स्तन ऊतक) के स्वस्थ विकास में बाधक हो सकता है।
इस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिकों ने लिप्सस्टिक में पाए जाने वाले ब्यूटाइल बेंजाइल थैलेट (बीपीपी) के साथ एक दूध देने वाली चूहिया पर इसका प्रयोग किया। इसमें पाया गया कि दूध के जरिये यह रसायन चूहिया के मादा बच्चे में भी चला गया।
डेली मेल के आनलाइन संस्करण के हवाले से बताया गया कि इस रसायन की वजह से दूध पीने वाली चूहिया की स्तन ग्रंथियों की कोशिकाओं में जीन संरचनाएं विकृत पाई गईं।
वैज्ञानिकों ने कहा कि कोई जरूरी नहीं कि इसका असर तुरंत दिख जाए कई बार इसका असर उम्र बढ़ने के बाद दिखाई दे सकता है।
शोधकर्ताओं ने बताया, ''इसे संकेत के रूप में लिया जा सकता है। यही मनुष्य में भी लागू हो सकता है। ''
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

Sunday 28 September 2008

कानों में घंटी बजना एक बीमारी
डॉ. रश्मि सुधा (Webdunia.com)

हमारे कान में एक कोकलिआ नामक अंग होता है जो हमें ध्वनि सुनने में मदद करता है। इस अंग के आस-पास छोटे-छोटे बाल होते हैं जो हमें आवाज़ सुनने में मदद करते हैं। जो लोग सुनने की परेशानी से ग्रसित होते हैं उनमें ये बाल या तो मुड़े हुए होते हैं या फिर नष्ट हो चुके होते हैं।

ये बाल ऑडिटरी सेल्स को चार्ज बनाए रखने में मदद करते हैं। इन सेल्स की वजह से ध्वनि संकेत हमारे दिमाग तक पहुँच पाते हैं।
कानों में घंटी बजती हुई सुनाई देने का भी कारण इन छोटे बालों में परेशानी होना या इनका नष्ट हो जाना ही है।

जो लोग कानों में घंटी बजने की समस्या से ग्रसित होते हैं उन्हें या तो एक या दोनों कानों में घंटी बजती हुई सुनाई देती है। इस बीमारी को टिनिटस भी कहा जाता है। इसमें जब दिमाग उसे मिलने वाले संकेतों को समझ नहीं पाता तो वह अपने द्वारा बनाए गए संकेतों के माध्यम से काम करता है और यही मरीज़ की परेशानी का कारण बनता है।

टिनिटस के कुछ प्रमुख कारण हो सकते हैं-
* इसका एक कारण कान में होने वाला संक्रमण हो सकता है जिसकी वजह से कान की हड्डी, ईयरड्रम या फिर मध्य कान में संक्रमण हो सकता है।

* यह समस्या बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के कारण भी हो सकती है। आजकल बहुत से युवा इस बीमारी से ग्रसित हैं और इसका मुख्य कारण है तेज़ आवाज़ में म्यूज़िक सुनना।


* यह बीमारी लगातार तनावग्रस्त रहने से भी हो सकती है।

* जो लोग सायनस या फिर किसी एलर्जी का शिकार हैं उन्हें भी यह बीमारी हो सकती है। इसका कारण है उनके द्वारा ली जाने वाली दवाइयाँ जो कई बार म्यूकस की सतह को मोटा कर देती हैं।


जो लोग कानों में घंटी बजने की समस्या से ग्रसित होते हैं उन्हें या तो एक या दोनों कानों में घंटी बजती हुई सुनाई देती है। इस बीमारी को टिनिटस भी कहा जाता है...





* सिर या दिमाग में लगने वाली चोट या ट्यूमर भी इस बीमारी को आमंत्रित कर सकते हैं।

* दाँतों की चिकित्सा के दौरान भी यह बीमारी होने का खतरा बना रहता है।

* रेड वाइन, चीज़, चॉकलेट जैसे खाद्य पदार्थों के ज़्यादा सेवन से भी यह बीमारी हो सकती है।

इस रोग से ग्रसित लोगों को कॉफी का सेवन कम करने के साथ-साथ ऐसे पदार्थों का सेवन बंद कर देना चाहिए जिसमें एस्प्रिन हो। ज़्यादा उम्र के लोगों को हियरिंग एड पहनने की भी सलाह दी जाती है।
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